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संविधान के अनुच्छेद (Indian Constitution All Articles in Hindi)

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Last Updated on 05 Jul 2026

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भारतीय संविधान दुनिया के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है। जब संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, तब इसमें 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं। समय के साथ कई संवैधानिक संशोधनों के कारण इसमें नए भाग, नए प्रावधान और नए अनुच्छेद जोड़े गए। आज भारतीय संविधान में 25 भाग, 12 अनुसूचियां और लगभग 448 अनुच्छेद हैं। 

इस ब्लॉग में हम Samvidhan ke Anuchchhed को आसान हिंदी में भागों के अनुसार समझेंगे, ताकि आप Indian Constitution All Articles in Hindi एक ही जगह पढ़ सकें। यह जानकारी UPSC, Judiciary, CLAT, CUET, SSC, State PCS और अन्य competitive exams की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बहुत उपयोगी है।

Table of Contents

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संविधान में कितने अनुच्छेद है?

वर्तमान में भारतीय संविधान में 448 अनुच्छेद हैं। संविधान लागू होने के समय भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। समय के साथ कई संशोधनों से नए अनुच्छेद जोड़े गए, कुछ बदले गए और कुछ निरस्त हुए। 

All Articles in Indian Constitution in Hindi (संविधान के अनुच्छेद)

नीचे All Articles of Indian Constitution in Hindi की table है। 

भाग अनुच्छेद विषय
भाग I अनुच्छेद 1 से 4 संघ और उसका राज्य क्षेत्र
भाग II अनुच्छेद 5 से 11 नागरिकता
भाग III अनुच्छेद 12 से 35 मौलिक अधिकार
भाग IV अनुच्छेद 36 से 51 राज्य के नीति निदेशक तत्व
भाग IVA अनुच्छेद 51A मौलिक कर्तव्य
भाग V अनुच्छेद 52 से 151 संघ सरकार
भाग VI अनुच्छेद 152 से 237 राज्य सरकार
भाग VII अनुच्छेद 238 निरस्त भाग, पहले Part B States से संबंधित था
भाग VIII अनुच्छेद 239 से 242 संघ राज्य क्षेत्र
भाग IX अनुच्छेद 243 से 243O पंचायत
भाग IXA अनुच्छेद 243P से 243ZG नगरपालिकाएं
भाग IXB अनुच्छेद 243ZH से 243ZT सहकारी समितियां
भाग X अनुच्छेद 244 से 244A अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र
भाग XI अनुच्छेद 245 से 263 संघ और राज्यों के बीच संबंध
भाग XII अनुच्छेद 264 से 300A वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद
भाग XIII अनुच्छेद 301 से 307 भारत के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम
भाग XIV अनुच्छेद 308 से 323 संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं
भाग XIVA अनुच्छेद 323A से 323B अधिकरण
भाग XV अनुच्छेद 324 से 329A निर्वाचन
भाग XVI अनुच्छेद 330 से 342A कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध
भाग XVII अनुच्छेद 343 से 351 राजभाषा
भाग XVIII अनुच्छेद 352 से 360 आपातकालीन उपबंध
भाग XIX अनुच्छेद 361 से 367 प्रकीर्ण उपबंध
भाग XX अनुच्छेद 368 भारतीय संविधान संशोधन
भाग XXI अनुच्छेद 369 से 392 अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध
भाग XXII अनुच्छेद 393 से 395 संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी पाठ और निरसन

भाग I: अनुच्छेद 1 से 4 (संघ और उसका राज्य क्षेत्र)

  • अनुच्छेद 1 – संघ का नाम और राज्य क्षेत्र
  • अनुच्छेद 2 – नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
  • अनुच्छेद 2क – सिक्किम को संघ से जोड़ने का प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 3 – नए राज्यों का गठन और मौजूदा राज्यों के क्षेत्र, सीमाओं या नामों में बदलाव
  • अनुच्छेद 4 – अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानूनों द्वारा प्रथम अनुसूची और चतुर्थ अनुसूची में संशोधन तथा अन्य पूरक विषय

भाग II: अनुच्छेद 5 से 11 (नागरिकता)

  • अनुच्छेद 5 – संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता
  • अनुच्छेद 6 – पाकिस्तान से भारत आए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार
  • अनुच्छेद 7 – पाकिस्तान गए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता के अधिकार
  • अनुच्छेद 8 – भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों की नागरिकता
  • अनुच्छेद 9 – विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से लेने वाले व्यक्ति भारत के नागरिक नहीं रहेंगे
  • अनुच्छेद 10 – नागरिकता के अधिकारों का जारी रहना
  • अनुच्छेद 11 – नागरिकता के अधिकार को कानून द्वारा नियंत्रित करने की संसद की शक्ति

भाग III: अनुच्छेद 12 से 35 (मौलिक अधिकार)

  • अनुच्छेद 12 – राज्य की परिभाषा
  • अनुच्छेद 13 – मौलिक अधिकारों के विरुद्ध या उन्हें कम करने वाले कानून
  • अनुच्छेद 14 – कानून के सामने समानता
  • अनुच्छेद 15 – धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध
  • अनुच्छेद 16 – सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता
  • अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता का अंत
  • अनुच्छेद 18 – उपाधियों का अंत
  • अनुच्छेद 19 – अभिव्यक्ति, सभा, संगठन, आवागमन, निवास और व्यवसाय की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 20 – अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण
  • अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण
  • अनुच्छेद 21क – 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार
  • अनुच्छेद 22 – गिरफ्तारी और निरोध के मामलों में संरक्षण
  • अनुच्छेद 23 – मानव तस्करी और जबरन श्रम का निषेध
  • अनुच्छेद 24 – कारखानों आदि में बच्चों के रोजगार का निषेध
  • अनुच्छेद 25 – अंत:करण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 26 – धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 27 – किसी विशेष धर्म के प्रचार के लिए कर देने की बाध्यता से स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 28 – कुछ शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में भाग लेने से स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 29 – अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण से जुड़े हित
  • अनुच्छेद 30 – अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार
  • अनुच्छेद 31 – संपत्ति का अधिकार; निरस्त
  • अनुच्छेद 31क – संपदाओं आदि के अधिग्रहण से संबंधित कानूनों का संरक्षण
  • अनुच्छेद 31ख – कुछ अधिनियमों और विनियमों का मान्यकरण
  • अनुच्छेद 31ग – कुछ नीति निदेशक तत्वों को लागू करने वाले कानूनों का संरक्षण
  • अनुच्छेद 31घ – राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से संबंधित कानूनों का संरक्षण; निरस्त
  • अनुच्छेद 32 – मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपचार
  • अनुच्छेद 32क – राज्य कानूनों की संवैधानिक वैधता पर विचार से संबंधित प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 33 – सशस्त्र बलों आदि के संबंध में मौलिक अधिकारों में संशोधन की संसद की शक्ति
  • अनुच्छेद 34 – किसी क्षेत्र में सैन्य कानून लागू होने पर मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 35 – इस भाग के प्रावधानों को लागू करने के लिए कानून बनाने की संसद की शक्ति

भाग IV: अनुच्छेद 36 से 51 (राज्य के नीति निदेशक तत्व)

  • अनुच्छेद 36 – इस भाग में राज्य की परिभाषा
  • अनुच्छेद 37 – इस भाग में दिए गए सिद्धांतों का लागू होना
  • अनुच्छेद 38 – लोक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक व्यवस्था
  • अनुच्छेद 39 – राज्य द्वारा पालन किए जाने वाले नीति सिद्धांत
  • अनुच्छेद 39क – समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता
  • अनुच्छेद 40 – ग्राम पंचायतों का संगठन
  • अनुच्छेद 41 – काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार
  • अनुच्छेद 42 – न्यायसंगत और मानवीय कामकाजी दशाएं तथा मातृत्व सहायता
  • अनुच्छेद 43 – कामगारों के लिए निर्वाह योग्य मजदूरी और अच्छी जीवन दशाएं
  • अनुच्छेद 43क – उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी
  • अनुच्छेद 43ख – सहकारी समितियों को बढ़ावा देना
  • अनुच्छेद 44 – नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता
  • अनुच्छेद 45 – 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्य देखभाल और शिक्षा
  • अनुच्छेद 46 – अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और कमजोर वर्गों के शैक्षिक तथा आर्थिक हितों को बढ़ावा देना
  • अनुच्छेद 47 – पोषण स्तर, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुधारना
  • अनुच्छेद 48 – कृषि और पशुपालन का संगठन
  • अनुच्छेद 48क – पर्यावरण, वन और वन्य जीवों का संरक्षण
  • अनुच्छेद 49 – राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और स्थानों का संरक्षण
  • अनुच्छेद 50 – न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना
  • अनुच्छेद 51 – अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना

भाग IVक: अनुच्छेद 51क (मौलिक कर्तव्य)

  • अनुच्छेद 51क – भारत के नागरिकों के मौलिक कर्तव्य

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भाग V: अनुच्छेद 52 से 151 (संघ)

अध्याय 1: कार्यपालिका

  • अनुच्छेद 52 – भारत का राष्ट्रपति
  • अनुच्छेद 53 – संघ की कार्यपालिका शक्ति
  • अनुच्छेद 54 – राष्ट्रपति का निर्वाचन
  • अनुच्छेद 55 – राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति
  • अनुच्छेद 56 – राष्ट्रपति का कार्यकाल
  • अनुच्छेद 57 – पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता
  • अनुच्छेद 58 – राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए योग्यताएं
  • अनुच्छेद 59 – राष्ट्रपति के पद की शर्तें
  • अनुच्छेद 60 – राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
  • अनुच्छेद 61 – राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया
  • अनुच्छेद 62 – राष्ट्रपति के पद की रिक्ति भरने के लिए निर्वाचन का समय और आकस्मिक रिक्ति भरने वाले व्यक्ति का कार्यकाल
  • अनुच्छेद 63 – भारत का उपराष्ट्रपति
  • अनुच्छेद 64 – उपराष्ट्रपति का राज्य सभा का पदेन सभापति होना
  • अनुच्छेद 65 – राष्ट्रपति के पद में रिक्ति या अनुपस्थिति की स्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना
  • अनुच्छेद 66 – उपराष्ट्रपति का निर्वाचन
  • अनुच्छेद 67 – उपराष्ट्रपति का कार्यकाल
  • अनुच्छेद 68 – उपराष्ट्रपति के पद की रिक्ति भरने के लिए निर्वाचन का समय और आकस्मिक रिक्ति भरने वाले व्यक्ति का कार्यकाल
  • अनुच्छेद 69 – उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
  • अनुच्छेद 70 – अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन
  • अनुच्छेद 71 – राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवाद
  • अनुच्छेद 72 – राष्ट्रपति की क्षमा, दंड-परिवर्तन, दंड-परिहार, दंड-स्थगन और दंड-लघुकरण की शक्ति
  • अनुच्छेद 73 – संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
  • अनुच्छेद 74 – राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
  • अनुच्छेद 75 – मंत्रियों से संबंधित अन्य प्रावधान
  • अनुच्छेद 76 – भारत का महान्यायवादी
  • अनुच्छेद 77 – भारत सरकार के कार्य का संचालन
  • अनुच्छेद 78 – राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य

अध्याय 2: संसद

  • अनुच्छेद 79 – संसद का गठन
  • अनुच्छेद 80 – राज्य सभा की संरचना
  • अनुच्छेद 81 – लोक सभा की संरचना
  • अनुच्छेद 82 – प्रत्येक जनगणना के बाद पुनर्समायोजन
  • अनुच्छेद 83 – संसद के सदनों की अवधि
  • अनुच्छेद 84 – संसद की सदस्यता के लिए योग्यताएं
  • अनुच्छेद 85 – संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन
  • अनुच्छेद 86 – राष्ट्रपति का सदनों को संबोधित करने और संदेश भेजने का अधिकार
  • अनुच्छेद 87 – राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
  • अनुच्छेद 88 – मंत्रियों और महान्यायवादी का सदनों में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार
  • अनुच्छेद 89 – राज्य सभा का सभापति और उपसभापति
  • अनुच्छेद 90 – उपसभापति के पद का रिक्त होना, त्यागपत्र और पद से हटाया जाना
  • अनुच्छेद 91 – सभापति के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति
  • अनुच्छेद 92 – जब उपसभापति को पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब उसका अध्यक्षता न करना
  • अनुच्छेद 93 – लोक सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
  • अनुच्छेद 94 – अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद का रिक्त होना, त्यागपत्र और पद से हटाया जाना
  • अनुच्छेद 95 – अध्यक्ष के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति
  • अनुच्छेद 96 – जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब उसका अध्यक्षता न करना
  • अनुच्छेद 97 – सभापति, उपसभापति, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
  • अनुच्छेद 98 – संसद का सचिवालय
  • अनुच्छेद 99 – सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
  • अनुच्छेद 100 – सदनों में मतदान, रिक्तियों के बावजूद सदनों की कार्यवाही और गणपूर्ति
  • अनुच्छेद 101 – स्थानों का रिक्त होना
  • अनुच्छेद 102 – सदस्यता के लिए अयोग्यताएं
  • अनुच्छेद 103 – सदस्यों की अयोग्यता से जुड़े प्रश्नों पर निर्णय
  • अनुच्छेद 104 – शपथ लेने से पहले या अयोग्य होने पर बैठने और मतदान करने की दंडात्मक व्यवस्था
  • अनुच्छेद 105 – संसद के सदनों तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां
  • अनुच्छेद 106 – सदस्यों के वेतन और भत्ते
  • अनुच्छेद 107 – विधेयकों के पेश किए जाने और पारित किए जाने से संबंधित प्रावधान
  • अनुच्छेद 108 – कुछ स्थितियों में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
  • अनुच्छेद 109 – धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया
  • अनुच्छेद 110 – धन विधेयक की परिभाषा
  • अनुच्छेद 111 – विधेयकों पर राष्ट्रपति की अनुमति
  • अनुच्छेद 112 – वार्षिक वित्तीय विवरण
  • अनुच्छेद 113 – संसद में अनुमान से संबंधित प्रक्रिया
  • अनुच्छेद 114 – विनियोग विधेयक
  • अनुच्छेद 115 – अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान
  • अनुच्छेद 116 – लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान
  • अनुच्छेद 117 – वित्तीय विधेयकों के बारे में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 118 – प्रक्रिया के नियम
  • अनुच्छेद 119 – वित्तीय कार्य से संबंधित संसदीय प्रक्रिया का कानून द्वारा विनियमन
  • अनुच्छेद 120 – संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा
  • अनुच्छेद 121 – संसद में न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा पर रोक
  • अनुच्छेद 122 – संसद की कार्यवाहियों की अदालतों द्वारा जांच न किया जाना

अध्याय 3: राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां

  • अनुच्छेद 123 – संसद के अवकाश के दौरान अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति

अध्याय 4: संघ की न्यायपालिका

  • अनुच्छेद 124 – सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन
  • अनुच्छेद 124क – राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग; निरस्त
  • अनुच्छेद 124ख – राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के कार्य; निरस्त
  • अनुच्छेद 124ग – राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से संबंधित प्रक्रिया का विनियमन; निरस्त
  • अनुच्छेद 125 – न्यायाधीशों के वेतन आदि
  • अनुच्छेद 126 – कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 127 – तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 128 – सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सर्वोच्च न्यायालय की बैठकों में उपस्थिति
  • अनुच्छेद 129 – सर्वोच्च न्यायालय का अभिलेख न्यायालय होना
  • अनुच्छेद 130 – सर्वोच्च न्यायालय का स्थान
  • अनुच्छेद 131 – सर्वोच्च न्यायालय की प्रारंभिक अधिकारिता
  • अनुच्छेद 131क – कुछ केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय की विशेष अधिकारिता; निरस्त
  • अनुच्छेद 132 – कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से अपील में सर्वोच्च न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता
  • अनुच्छेद 133 – दीवानी मामलों में उच्च न्यायालयों से अपील में सर्वोच्च न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता
  • अनुच्छेद 134 – आपराधिक मामलों में सर्वोच्च न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता
  • अनुच्छेद 134क – सर्वोच्च न्यायालय में अपील के लिए प्रमाणपत्र
  • अनुच्छेद 135 – वर्तमान कानून के अधीन संघीय न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रयोग
  • अनुच्छेद 136 – सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपील की विशेष अनुमति
  • अनुच्छेद 137 – सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णयों या आदेशों का पुनर्विलोकन
  • अनुच्छेद 138 – सर्वोच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार
  • अनुच्छेद 139 – कुछ रिट जारी करने की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति
  • अनुच्छेद 139क – कुछ मामलों का स्थानांतरण
  • अनुच्छेद 140 – सर्वोच्च न्यायालय की सहायक शक्तियां
  • अनुच्छेद 141 – सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगा
  • अनुच्छेद 142 – सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और डिक्री का प्रवर्तन तथा पूर्ण न्याय करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 143 – राष्ट्रपति की सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांगने की शक्ति
  • अनुच्छेद 144 – सभी सिविल और न्यायिक प्राधिकरणों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की सहायता
  • अनुच्छेद 144क – कानूनों की संवैधानिक वैधता से जुड़े प्रश्नों के निपटारे के लिए विशेष प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 145 – सर्वोच्च न्यायालय के नियम
  • अनुच्छेद 146 – सर्वोच्च न्यायालय के अधिकारी, सेवक और खर्च
  • अनुच्छेद 147 – निर्वचन

अध्याय 5: भारत का नियंत्रक-महालेखा परीक्षक

  • अनुच्छेद 148 – भारत का नियंत्रक-महालेखा परीक्षक
  • अनुच्छेद 149 – नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के कर्तव्य और शक्तियां
  • अनुच्छेद 150 – संघ और राज्यों के खातों का रूप
  • अनुच्छेद 151 – लेखा परीक्षा प्रतिवेदन

भाग VI: अनुच्छेद 152 से 237 (राज्य)

अध्याय 1: सामान्य

  • अनुच्छेद 152 – परिभाषा

अध्याय 2: कार्यपालिका

  • अनुच्छेद 153 – राज्यों के राज्यपाल
  • अनुच्छेद 154 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति
  • अनुच्छेद 155 – राज्यपाल की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 156 – राज्यपाल का कार्यकाल
  • अनुच्छेद 157 – राज्यपाल नियुक्त होने के लिए योग्यताएं
  • अनुच्छेद 158 – राज्यपाल के पद की शर्तें
  • अनुच्छेद 159 – राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
  • अनुच्छेद 160 – कुछ आकस्मिक परिस्थितियों में राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन
  • अनुच्छेद 161 – राज्यपाल की क्षमा, दंड-परिवर्तन, दंड-परिहार, दंड-स्थगन और दंड-लघुकरण की शक्ति
  • अनुच्छेद 162 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
  • अनुच्छेद 163 – राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
  • अनुच्छेद 164 – मंत्रियों से संबंधित अन्य प्रावधान
  • अनुच्छेद 165 – राज्य का महाधिवक्ता
  • अनुच्छेद 166 – राज्य सरकार के कार्य का संचालन
  • अनुच्छेद 167 – राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य

अध्याय 3: राज्य विधानमंडल

  • अनुच्छेद 168 – राज्यों में विधानमंडलों का गठन
  • अनुच्छेद 169 – राज्यों में विधान परिषदों का समाप्त किया जाना या निर्माण
  • अनुच्छेद 170 – विधान सभाओं की संरचना
  • अनुच्छेद 171 – विधान परिषदों की संरचना
  • अनुच्छेद 172 – राज्य विधानमंडलों की अवधि
  • अनुच्छेद 173 – राज्य विधानमंडल की सदस्यता के लिए योग्यताएं
  • अनुच्छेद 174 – राज्य विधानमंडल के सत्र, सत्रावसान और विघटन
  • अनुच्छेद 175 – राज्यपाल का सदन या सदनों को संबोधित करने और संदेश भेजने का अधिकार
  • अनुच्छेद 176 – राज्यपाल का विशेष अभिभाषण
  • अनुच्छेद 177 – मंत्रियों और महाधिवक्ता का सदन या सदनों में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार
  • अनुच्छेद 178 – विधान सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
  • अनुच्छेद 179 – अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद का रिक्त होना, त्यागपत्र और पद से हटाया जाना
  • अनुच्छेद 180 – अध्यक्ष के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति
  • अनुच्छेद 181 – जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब उसका अध्यक्षता न करना
  • अनुच्छेद 182 – विधान परिषद का सभापति और उपसभापति
  • अनुच्छेद 183 – सभापति और उपसभापति के पद का रिक्त होना, त्यागपत्र और पद से हटाया जाना
  • अनुच्छेद 184 – सभापति के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति
  • अनुच्छेद 185 – जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब उसका अध्यक्षता न करना
  • अनुच्छेद 186 – अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते
  • अनुच्छेद 187 – राज्य विधानमंडल का सचिवालय
  • अनुच्छेद 188 – सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
  • अनुच्छेद 189 – सदनों में मतदान, रिक्तियों के बावजूद सदनों की कार्यवाही और गणपूर्ति
  • अनुच्छेद 190 – स्थानों का रिक्त होना
  • अनुच्छेद 191 – सदस्यता के लिए अयोग्यताएं
  • अनुच्छेद 192 – सदस्यों की अयोग्यता से जुड़े प्रश्नों पर निर्णय
  • अनुच्छेद 193 – शपथ लेने से पहले या अयोग्य होने पर बैठने और मतदान करने की दंडात्मक व्यवस्था
  • अनुच्छेद 194 – राज्य विधानमंडल के सदनों तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां
  • अनुच्छेद 195 – सदस्यों के वेतन और भत्ते
  • अनुच्छेद 196 – विधेयकों के पेश किए जाने और पारित किए जाने से संबंधित प्रावधान
  • अनुच्छेद 197 – धन विधेयकों से अलग अन्य विधेयकों के संबंध में विधान परिषद की शक्तियों पर सीमा
  • अनुच्छेद 198 – धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया
  • अनुच्छेद 199 – धन विधेयक की परिभाषा
  • अनुच्छेद 200 – विधेयकों पर राज्यपाल की अनुमति
  • अनुच्छेद 201 – विचार के लिए सुरक्षित रखे गए विधेयक
  • अनुच्छेद 202 – वार्षिक वित्तीय विवरण
  • अनुच्छेद 203 – विधानमंडल में अनुमान से संबंधित प्रक्रिया
  • अनुच्छेद 204 – विनियोग विधेयक
  • अनुच्छेद 205 – अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान
  • अनुच्छेद 206 – लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान
  • अनुच्छेद 207 – वित्तीय विधेयकों के बारे में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 208 – प्रक्रिया के नियम
  • अनुच्छेद 209 – वित्तीय कार्य से संबंधित राज्य विधानमंडल की प्रक्रिया का कानून द्वारा विनियमन
  • अनुच्छेद 210 – राज्य विधानमंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा
  • अनुच्छेद 211 – विधानमंडल में न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा पर रोक
  • अनुच्छेद 212 – राज्य विधानमंडल की कार्यवाहियों की अदालतों द्वारा जांच न किया जाना

अध्याय 4: राज्यपाल की विधायी शक्ति

  • अनुच्छेद 213 – विधानमंडल के अवकाश के दौरान अध्यादेश जारी करने की राज्यपाल की शक्ति

अध्याय 5: राज्यों के उच्च न्यायालय

  • अनुच्छेद 214 – राज्यों के लिए उच्च न्यायालय
  • अनुच्छेद 215 – उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना
  • अनुच्छेद 216 – उच्च न्यायालयों का गठन
  • अनुच्छेद 217 – उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और पद की शर्तें
  • अनुच्छेद 218 – सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित कुछ प्रावधानों का उच्च न्यायालयों पर लागू होना
  • अनुच्छेद 219 – उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
  • अनुच्छेद 220 – स्थायी न्यायाधीश रहने के बाद विधि व्यवसाय पर प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 221 – न्यायाधीशों के वेतन आदि
  • अनुच्छेद 222 – किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण
  • अनुच्छेद 223 – कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 224 – अतिरिक्त और कार्यवाहक न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 224क – सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उच्च न्यायालयों की बैठकों में नियुक्ति
  • अनुच्छेद 225 – वर्तमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता
  • अनुच्छेद 226 – कुछ रिट जारी करने की उच्च न्यायालयों की शक्ति
  • अनुच्छेद 226क – केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक वैधता पर विचार से संबंधित प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 227 – सभी न्यायालयों पर उच्च न्यायालय की अधीक्षण शक्ति
  • अनुच्छेद 228 – कुछ मामलों का उच्च न्यायालय में स्थानांतरण
  • अनुच्छेद 228क – राज्य कानूनों की संवैधानिक वैधता से जुड़े प्रश्नों के निपटारे के लिए विशेष प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 229 – उच्च न्यायालयों के अधिकारी, सेवक और खर्च
  • अनुच्छेद 230 – उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्य क्षेत्रों तक विस्तार
  • अनुच्छेद 231 – दो या अधिक राज्यों के लिए एक सामान्य उच्च न्यायालय की स्थापना

अध्याय 6: अधीनस्थ न्यायालय

  • अनुच्छेद 233 – जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 233क – कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों और निर्णयों का मान्यकरण
  • अनुच्छेद 234 – न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से अलग व्यक्तियों की भर्ती
  • अनुच्छेद 235 – अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण
  • अनुच्छेद 236 – निर्वचन
  • अनुच्छेद 237 – इस अध्याय के प्रावधानों का कुछ वर्गों के मजिस्ट्रेटों पर लागू होना

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भाग VII: अनुच्छेद 238 (पहली अनुसूची के भाग ख में शामिल राज्य)

  • अनुच्छेद 238 – पहली अनुसूची के भाग ख में शामिल राज्यों से संबंधित प्रावधान; निरस्त

भाग VIII: अनुच्छेद 239 से 242 (संघ राज्य क्षेत्र)

  • अनुच्छेद 239 – संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन
  • अनुच्छेद 239क – कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए स्थानीय विधानमंडल या मंत्रिपरिषद या दोनों का निर्माण
  • अनुच्छेद 239कक – दिल्ली के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 239कख – संवैधानिक व्यवस्था विफल होने पर प्रावधान
  • अनुच्छेद 239ख – विधानमंडल के अवकाश के दौरान प्रशासक की अध्यादेश जारी करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 240 – कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए नियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति
  • अनुच्छेद 241 – संघ राज्य क्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय
  • अनुच्छेद 242 – कूर्ग से संबंधित प्रावधान; निरस्त

भाग IX: अनुच्छेद 243 से 243ण (पंचायत)

  • अनुच्छेद 243 – परिभाषाएं
  • अनुच्छेद 243क – ग्राम सभा
  • अनुच्छेद 243ख – पंचायतों का गठन
  • अनुच्छेद 243ग – पंचायतों की संरचना
  • अनुच्छेद 243घ – स्थानों का आरक्षण
  • अनुच्छेद 243ङ – पंचायतों की अवधि
  • अनुच्छेद 243च – सदस्यता के लिए अयोग्यताएं
  • अनुच्छेद 243छ – पंचायतों की शक्तियां, अधिकार और जिम्मेदारियां
  • अनुच्छेद 243ज – पंचायतों द्वारा कर लगाने की शक्ति और उनकी निधियां
  • अनुच्छेद 243झ – वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए वित्त आयोग का गठन
  • अनुच्छेद 243ञ – पंचायतों के खातों की लेखा परीक्षा
  • अनुच्छेद 243ट – पंचायतों के चुनाव
  • अनुच्छेद 243ठ – संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू होना
  • अनुच्छेद 243ड – इस भाग का कुछ क्षेत्रों पर लागू न होना
  • अनुच्छेद 243ढ – वर्तमान कानूनों और पंचायतों का जारी रहना
  • अनुच्छेद 243ण – चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक

भाग IXक: अनुच्छेद 243त से 243यछ (नगरपालिकाएं)

  • अनुच्छेद 243त – परिभाषाएं
  • अनुच्छेद 243थ – नगरपालिकाओं का गठन
  • अनुच्छेद 243द – नगरपालिकाओं की संरचना
  • अनुच्छेद 243ध – वार्ड समितियों का गठन और संरचना
  • अनुच्छेद 243न – स्थानों का आरक्षण
  • अनुच्छेद 243प – नगरपालिकाओं की अवधि
  • अनुच्छेद 243फ – सदस्यता के लिए अयोग्यताएं
  • अनुच्छेद 243ब – नगरपालिकाओं की शक्तियां, अधिकार और जिम्मेदारियां
  • अनुच्छेद 243भ – नगरपालिकाओं द्वारा कर लगाने की शक्ति और उनकी निधियां
  • अनुच्छेद 243म – वित्त आयोग
  • अनुच्छेद 243य – नगरपालिकाओं के खातों की लेखा परीक्षा
  • अनुच्छेद 243यक – नगरपालिकाओं के चुनाव
  • अनुच्छेद 243यख – संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू होना
  • अनुच्छेद 243यग – इस भाग का कुछ क्षेत्रों पर लागू न होना
  • अनुच्छेद 243यघ – जिला योजना समिति
  • अनुच्छेद 243यङ – महानगर योजना समिति
  • अनुच्छेद 243यच – वर्तमान कानूनों और नगरपालिकाओं का जारी रहना
  • अनुच्छेद 243यछ – चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक

भाग IXख: अनुच्छेद 243यज से 243यन (सहकारी समितियां)

  • अनुच्छेद 243यज – परिभाषाएं
  • अनुच्छेद 243यझ – सहकारी समितियों का गठन
  • अनुच्छेद 243यञ – निदेशक मंडल के सदस्यों और पदाधिकारियों की संख्या और कार्यकाल
  • अनुच्छेद 243यट – निदेशक मंडल के सदस्यों का चुनाव
  • अनुच्छेद 243यठ – निदेशक मंडल का अधिक्रमण और निलंबन तथा अंतरिम प्रबंधन
  • अनुच्छेद 243यड – सहकारी समितियों के खातों की लेखा परीक्षा
  • अनुच्छेद 243यढ – सामान्य निकाय की बैठक बुलाना
  • अनुच्छेद 243यण – सदस्यों को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार
  • अनुच्छेद 243यत – विवरणियां
  • अनुच्छेद 243यथ – अपराध और दंड
  • अनुच्छेद 243यद – बहु-राज्य सहकारी समितियों पर लागू होना
  • अनुच्छेद 243यध – संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू होना
  • अनुच्छेद 243यन – वर्तमान कानूनों का जारी रहना

भाग X: अनुच्छेद 244 से 244क (अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र)

  • अनुच्छेद 244 – अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन
  • अनुच्छेद 244क – असम के कुछ जनजातीय क्षेत्रों को मिलाकर स्वायत्त राज्य का निर्माण और उसके लिए स्थानीय विधानमंडल या मंत्रिपरिषद या दोनों का गठन

भाग XI: अनुच्छेद 245 से 263 (संघ और राज्यों के बीच संबंध)

अध्याय 1: विधायी संबंध

  • अनुच्छेद 245 – संसद और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों का विस्तार
  • अनुच्छेद 246 – संसद और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाए जाने वाले कानूनों के विषय
  • अनुच्छेद 246क – माल और सेवा कर के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 247 – संसद की कुछ अतिरिक्त न्यायालय स्थापित करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 248 – अवशिष्ट विधायी शक्तियां
  • अनुच्छेद 249 – राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषय पर संसद की कानून बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 250 – आपातकाल के दौरान राज्य सूची के विषय पर संसद की कानून बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 251 – अनुच्छेद 249 और 250 के तहत संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और राज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों में असंगति
  • अनुच्छेद 252 – दो या अधिक राज्यों की सहमति से संसद की राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 253 – अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए संसद की कानून बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 254 – संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों में असंगति
  • अनुच्छेद 255 – सिफारिशों और पूर्व स्वीकृति से जुड़ी आवश्यकताओं को केवल प्रक्रिया का विषय माना जाना

अध्याय 2: प्रशासनिक संबंध

  • अनुच्छेद 256 – राज्यों और संघ की बाध्यता
  • अनुच्छेद 257 – कुछ मामलों में राज्यों पर संघ का नियंत्रण
  • अनुच्छेद 257क – राज्यों की सहायता के लिए संघ के सशस्त्र बलों या अन्य बलों की तैनाती; निरस्त
  • अनुच्छेद 258 – कुछ मामलों में राज्यों को शक्ति प्रदान करने की संघ की शक्ति
  • अनुच्छेद 258क – संघ को कार्य सौंपने की राज्यों की शक्ति
  • अनुच्छेद 259 – पहली अनुसूची के भाग ख में शामिल राज्यों में सशस्त्र बल; निरस्त
  • अनुच्छेद 260 – भारत के बाहर के क्षेत्रों के संबंध में संघ की अधिकारिता
  • अनुच्छेद 261 – सार्वजनिक कार्य, अभिलेख और न्यायिक कार्यवाहियां
  • अनुच्छेद 262 – अंतरराज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल से जुड़े विवादों का निर्णय
  • अनुच्छेद 263 – अंतरराज्यीय परिषद से संबंधित प्रावधान

भाग XII: अनुच्छेद 264 से 300क (वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद)

अध्याय 1: वित्त

  • अनुच्छेद 264 – निर्वचन
  • अनुच्छेद 265 – कानून के अधिकार के बिना कर नहीं लगाया जाएगा
  • अनुच्छेद 266 – भारत और राज्यों की संचित निधियां तथा लोक लेखे
  • अनुच्छेद 267 – आकस्मिकता निधि
  • अनुच्छेद 268 – संघ द्वारा लगाए गए, लेकिन राज्यों द्वारा एकत्रित और उपयोग किए जाने वाले शुल्क
  • अनुच्छेद 268क – संघ द्वारा लगाया गया सेवा कर और संघ तथा राज्यों द्वारा संग्रह और उपयोग; निरस्त
  • अनुच्छेद 269 – संघ द्वारा लगाए और एकत्रित कर, लेकिन राज्यों को सौंपे जाने वाले कर
  • अनुच्छेद 269क – अंतरराज्यीय व्यापार या वाणिज्य में माल और सेवा कर का संग्रह और उपयोग
  • अनुच्छेद 270 – संघ द्वारा लगाए और वितरित किए जाने वाले कर
  • अनुच्छेद 271 – कुछ शुल्कों और करों पर संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार
  • अनुच्छेद 272 – संघ द्वारा लगाए और एकत्रित किए जाने वाले कर, जिन्हें संघ और राज्यों के बीच वितरित किया जा सकता था; निरस्त
  • अनुच्छेद 273 – जूट और जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के बदले अनुदान; समाप्त
  • अनुच्छेद 274 – कराधान से जुड़े उन विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश, जिनमें राज्यों का हित हो
  • अनुच्छेद 275 – कुछ राज्यों को संघ से अनुदान
  • अनुच्छेद 276 – व्यवसाय, व्यापार, आजीविका और रोजगार पर कर
  • अनुच्छेद 277 – बचत
  • अनुच्छेद 278 – कुछ वित्तीय समझौतों से संबंधित प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 279 – शुद्ध आय की गणना
  • अनुच्छेद 279क – माल और सेवा कर परिषद
  • अनुच्छेद 280 – वित्त आयोग
  • अनुच्छेद 281 – वित्त आयोग की सिफारिशें
  • अनुच्छेद 282 – संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से किए जाने वाले व्यय
  • अनुच्छेद 283 – संचित निधियों, आकस्मिकता निधियों और लोक लेखों में जमा धन की अभिरक्षा आदि
  • अनुच्छेद 284 – लोक सेवकों और न्यायालयों द्वारा प्राप्त धन की अभिरक्षा
  • अनुच्छेद 285 – संघ की संपत्ति को राज्य करों से छूट
  • अनुच्छेद 286 – माल की खरीद या बिक्री पर कर लगाने में राज्यों पर प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 287 – बिजली पर करों से छूट
  • अनुच्छेद 288 – कुछ मामलों में पानी या बिजली पर राज्य करों से छूट
  • अनुच्छेद 289 – राज्यों की संपत्ति और आय को संघ करों से छूट
  • अनुच्छेद 290 – कुछ खर्चों और पेंशनों के संबंध में समायोजन
  • अनुच्छेद 290क – कुछ देवस्वम निधियों को वार्षिक भुगतान
  • अनुच्छेद 291 – शासकों की निजी थैलियां; निरस्त

अध्याय 2: उधार लेना

  • अनुच्छेद 292 – भारत सरकार द्वारा उधार लेना
  • अनुच्छेद 293 – राज्यों द्वारा उधार लेना

अध्याय 3: संपत्ति, संविदाएं, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएं और वाद

  • अनुच्छेद 294 – कुछ मामलों में संपत्ति, परिसंपत्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार
  • अनुच्छेद 295 – अन्य मामलों में संपत्ति, परिसंपत्तियों, अधिकारों, दायित्वों और बाध्यताओं का उत्तराधिकार
  • अनुच्छेद 296 – राजगामी या व्यपगत संपत्ति और स्वामीविहीन वस्तुएं
  • अनुच्छेद 297 – क्षेत्रीय जल या महाद्वीपीपीय मग्नतट में स्थित मूल्यवान वस्तुएं और आर्थिक क्षेत्र के साधन संघ में निहित होंगे
  • अनुच्छेद 298 – व्यापार आदि करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 299 – संविदाएं
  • अनुच्छेद 300 – वाद और कार्यवाहियां

अध्याय 4: संपत्ति का अधिकार

  • अनुच्छेद 300क – कानून के अधिकार के बिना किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा

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भाग XIII: अनुच्छेद 301 से 307 (भारत के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम)

  • अनुच्छेद 301 – व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 302 – व्यापार, वाणिज्य और समागम पर प्रतिबंध लगाने की संसद की शक्ति
  • अनुच्छेद 303 – व्यापार और वाणिज्य के संबंध में संघ और राज्यों की विधायी शक्तियों पर प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 304 – राज्यों के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 305 – मौजूदा कानूनों और राज्य के एकाधिकार वाले कानूनों की बचत
  • अनुच्छेद 306 – पहली अनुसूची के भाग ख में शामिल कुछ राज्यों की व्यापार और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति; निरस्त
  • अनुच्छेद 307 – अनुच्छेद 301 से 304 के उद्देश्यों को लागू करने के लिए प्राधिकरण की नियुक्ति

भाग XIV: अनुच्छेद 308 से 323 (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं)

अध्याय 1: सेवाएं

  • अनुच्छेद 308 – निर्वचन
  • अनुच्छेद 309 – संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा शर्तें
  • अनुच्छेद 310 – संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों का पद राष्ट्रपति या राज्यपाल के प्रसादपर्यंत होना
  • अनुच्छेद 311 – संघ या राज्य के अधीन नागरिक पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की बर्खास्तगी, पद से हटाने या पदावनति से सुरक्षा
  • अनुच्छेद 312 – अखिल भारतीय सेवाएं
  • अनुच्छेद 312क – कुछ सेवाओं के अधिकारियों की सेवा शर्तों में बदलाव या समाप्ति की संसद की शक्ति
  • अनुच्छेद 313 – संक्रमणकालीन प्रावधान
  • अनुच्छेद 314 – कुछ सेवाओं के मौजूदा अधिकारियों की सुरक्षा से संबंधित प्रावधान; निरस्त

अध्याय 2: लोक सेवा आयोग

  • अनुच्छेद 315 – संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग
  • अनुच्छेद 316 – लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल
  • अनुच्छेद 317 – लोक सेवा आयोग के सदस्य को हटाया जाना या निलंबित किया जाना
  • अनुच्छेद 318 – आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों के संबंध में नियम बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 319 – आयोग के सदस्यों द्वारा पद छोड़ने के बाद पद धारण करने पर प्रतिबंध
  • अनुच्छेद 320 – लोक सेवा आयोगों के कार्य
  • अनुच्छेद 321 – लोक सेवा आयोगों के कार्यों का विस्तार करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 322 – लोक सेवा आयोगों के खर्च
  • अनुच्छेद 323 – लोक सेवा आयोगों की रिपोर्ट

भाग XIVक: अनुच्छेद 323क से 323ख

  • अनुच्छेद 323क – प्रशासनिक अधिकरण
  • अनुच्छेद 323ख – अन्य विषयों के लिए अधिकरण

भाग XV: अनुच्छेद 324 से 329क (निर्वाचन)

  • अनुच्छेद 324 – निर्वाचन आयोग में चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण
  • अनुच्छेद 325 – धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल होने से अयोग्य न ठहराया जाना
  • अनुच्छेद 326 – लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे
  • अनुच्छेद 327 – संसद की विधानमंडलों के चुनावों से संबंधित प्रावधान बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 328 – राज्य विधानमंडल की अपने राज्य के चुनावों से संबंधित प्रावधान बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 329 – चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक
  • अनुच्छेद 329क – प्रधानमंत्री और लोक सभा अध्यक्ष के चुनाव से जुड़े विशेष प्रावधान; निरस्त

भाग XVI: अनुच्छेद 330 से 342क (कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध)

  • अनुच्छेद 330 – लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण
  • अनुच्छेद 331 – लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व; निरस्त
  • अनुच्छेद 332 – राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण
  • अनुच्छेद 333 – राज्य विधान सभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व; निरस्त
  • अनुच्छेद 334 – आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व की अवधि
  • अनुच्छेद 335 – सेवाओं और पदों पर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावों का ध्यान रखा जाना
  • अनुच्छेद 336 – कुछ सेवाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 337 – आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए शैक्षिक अनुदान से संबंधित विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 338 – अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
  • अनुच्छेद 338क – अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
  • अनुच्छेद 338ख – पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोग
  • अनुच्छेद 339 – अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण पर संघ का नियंत्रण
  • अनुच्छेद 340 – पिछड़े वर्गों की स्थिति की जांच के लिए आयोग की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 341 – अनुसूचित जातियां
  • अनुच्छेद 342 – अनुसूचित जनजातियां
  • अनुच्छेद 342क – सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग

भाग XVII: अनुच्छेद 343 से 351 (राजभाषा)

अध्याय 1: संघ की भाषा

  • अनुच्छेद 343 – संघ की राजभाषा
  • अनुच्छेद 344 – राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति

अध्याय 2: प्रादेशिक भाषाएं

  • अनुच्छेद 345 – राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं
  • अनुच्छेद 346 – एक राज्य और दूसरे राज्य या राज्य और संघ के बीच संचार की राजभाषा
  • अनुच्छेद 347 – किसी राज्य की जनसंख्या के किसी भाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष प्रावधान

अध्याय 3: सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय आदि की भाषा

  • अनुच्छेद 348 – सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों, अधिनियमों, विधेयकों आदि में प्रयोग की जाने वाली भाषा
  • अनुच्छेद 349 – भाषा से संबंधित कुछ कानून बनाने की विशेष प्रक्रिया

अध्याय 4: विशेष निर्देश

  • अनुच्छेद 350 – किसी भी भाषा में शिकायत प्रस्तुत करने का अधिकार
  • अनुच्छेद 350क – प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं
  • अनुच्छेद 350ख – भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी
  • अनुच्छेद 351 – हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश

भाग XVIII: अनुच्छेद 352 से 360 (आपातकालीन उपबंध)

  • अनुच्छेद 352 – राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा
  • अनुच्छेद 353 – आपातकाल की उद्घोषणा का प्रभाव
  • अनुच्छेद 354 – आपातकाल लागू होने पर राजस्व वितरण से जुड़े प्रावधानों का लागू होना
  • अनुच्छेद 355 – राज्यों को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाने का संघ का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 356 – राज्यों में संवैधानिक व्यवस्था विफल होने पर प्रावधान
  • अनुच्छेद 357 – अनुच्छेद 356 के तहत जारी उद्घोषणा के अंतर्गत विधायी शक्तियों का प्रयोग
  • अनुच्छेद 358 – आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 के प्रावधानों का निलंबन
  • अनुच्छेद 359 – आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रवर्तन का निलंबन
  • अनुच्छेद 359क – पंजाब राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 360 – वित्तीय आपातकाल से संबंधित प्रावधान

भाग XIX: अनुच्छेद 361 से 367 (प्रकीर्ण)

  • अनुच्छेद 361 – राष्ट्रपति, राज्यपालों और राजप्रमुखों का संरक्षण
  • अनुच्छेद 361क – संसद और राज्य विधानमंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण
  • अनुच्छेद 361ख – लाभकारी राजनीतिक पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्यता
  • अनुच्छेद 362 – देशी राज्यों के शासकों के अधिकारों और विशेषाधिकारों से संबंधित प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 363 – कुछ संधियों, करारों आदि से उत्पन्न विवादों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक
  • अनुच्छेद 363क – देशी राज्यों के शासकों की मान्यता समाप्त करना और निजी थैलियों का अंत
  • अनुच्छेद 364 – प्रमुख बंदरगाहों और विमानक्षेत्रों के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 365 – संघ के निर्देशों का पालन न करने की स्थिति में प्रभाव
  • अनुच्छेद 366 – परिभाषाएं
  • अनुच्छेद 367 – निर्वचन

भाग XX: अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन)

  • अनुच्छेद 368 – संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसकी प्रक्रिया

भाग XXI: अनुच्छेद 369 से 392 (अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध)

  • अनुच्छेद 369 – राज्य सूची के कुछ विषयों पर अस्थायी रूप से संसद की कानून बनाने की शक्ति
  • अनुच्छेद 370 – जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी प्रावधान
  • अनुच्छेद 371 – महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371क – नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371ख – असम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371ग – मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371घ – आंध्र प्रदेश या तेलंगाना राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371ङ – आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना
  • अनुच्छेद 371च – सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371छ – मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371ज – अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371झ – गोवा राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 371ञ – कर्नाटक राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 372 – मौजूदा कानूनों का लागू रहना और उनका अनुकूलन
  • अनुच्छेद 372क – कानूनों के अनुकूलन की राष्ट्रपति की शक्ति
  • अनुच्छेद 373 – निवारक निरोध से जुड़े कुछ मामलों में आदेश देने की राष्ट्रपति की शक्ति
  • अनुच्छेद 374 – संघीय न्यायालय के न्यायाधीशों और संघीय न्यायालय में लंबित कार्यवाहियों से जुड़े प्रावधान
  • अनुच्छेद 375 – संविधान के अधीन न्यायालयों, प्राधिकरणों और अधिकारियों का कार्य जारी रहना
  • अनुच्छेद 376 – उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों से जुड़े प्रावधान
  • अनुच्छेद 377 – भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक से जुड़े प्रावधान
  • अनुच्छेद 378 – लोक सेवा आयोगों से जुड़े प्रावधान
  • अनुच्छेद 378क – आंध्र प्रदेश विधान सभा की अवधि से जुड़ा विशेष प्रावधान
  • अनुच्छेद 379 – अंतरिम संसद और उसके अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 380 – राष्ट्रपति से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 381 – राष्ट्रपति की मंत्रिपरिषद से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 382 – अंतरिम संसद और उसके अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष से जुड़े अन्य प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 383 – राज्यों की विधान सभाओं से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 384 – राज्यपालों से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 385 – राज्यों की मंत्रिपरिषद से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 386 – कुछ मामलों में अंतरिम प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 387 – मौजूदा कानूनों के अनुकूलन से जुड़ा प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 388 – लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में सीटों से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 389 – संसद और राज्यों के विधानमंडलों की कार्यवाहियों से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 390 – राष्ट्रपति की कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति; निरस्त
  • अनुच्छेद 391 – कुछ आकस्मिकताओं से जुड़े प्रावधान; निरस्त
  • अनुच्छेद 392 – कठिनाइयों को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति

भाग XXII: अनुच्छेद 393 से 395 (संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिंदी पाठ और निरसन)

  • अनुच्छेद 393 – संक्षिप्त नाम
  • अनुच्छेद 394 – प्रारंभ
  • अनुच्छेद 394क – हिंदी भाषा में प्राधिकृत पाठ
  • अनुच्छेद 395 – निरसन

संविधान के सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Important Articles in Hindi)

अनुच्छेद विषय क्यों महत्वपूर्ण है
अनुच्छेद 1 संघ का नाम और राज्य क्षेत्र यह भारत को “राज्यों का संघ” बताता है और देश की संवैधानिक पहचान तय करता है।
अनुच्छेद 3 नए राज्यों का गठन संसद को राज्यों की सीमा, क्षेत्र और नाम बदलने की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा मौलिक अधिकारों के संदर्भ में “राज्य” का अर्थ बताता है।
अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार कानून के सामने समानता और कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी देता है।
अनुच्छेद 15 भेदभाव का निषेध धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव रोकता है।
अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर सरकारी नौकरियों में समान अवसर का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता का अधिकार बोलने, अभिव्यक्ति, सभा, संगठन, आवागमन, निवास और व्यवसाय की स्वतंत्रता देता है।
अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता यह जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा, निजता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया से जुड़ा सबसे व्यापक अधिकार है।
अनुच्छेद 21क शिक्षा का अधिकार 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता व्यक्ति को धर्म मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है।
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचार मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता का नीति सिद्धांत देता है।
अनुच्छेद 51क मौलिक कर्तव्य भारतीय नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को बताता है।
अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति राष्ट्रपति को क्षमा, दंड-परिवर्तन, दंड-परिहार और दंड-लघुकरण की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 110 धन विधेयक धन विधेयक की परिभाषा बताता है, जो संसद की वित्तीय प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण है।
अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना और गठन से जुड़ा है।
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय की रिट शक्ति उच्च न्यायालय को मौलिक और अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए रिट जारी करने की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 246 विधायी शक्तियों का वितरण केंद्र और राज्यों के बीच कानून बनाने की शक्तियों का बंटवारा करता है।
अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निर्वाचन आयोग को देता है।
अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और प्रक्रिया बताता है।

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बाद में जोड़े गए Anuchchhed in Hindi

अनुच्छेद संशोधन विषय
अनुच्छेद 21क 86वां संविधान संशोधन, 2002 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद 31क पहला संविधान संशोधन, 1951 संपदाओं के अधिग्रहण से जुड़े कानूनों का संरक्षण
अनुच्छेद 31ख पहला संविधान संशोधन, 1951 नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों का संरक्षण
अनुच्छेद 31ग 25वां संविधान संशोधन, 1971 कुछ नीति निदेशक तत्वों को लागू करने वाले कानूनों का संरक्षण
अनुच्छेद 39क 42वां संविधान संशोधन, 1976 समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता
अनुच्छेद 43क 42वां संविधान संशोधन, 1976 उद्योगों के प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी
अनुच्छेद 43ख 97वां संविधान संशोधन, 2011 सहकारी समितियों को बढ़ावा देना
अनुच्छेद 48क 42वां संविधान संशोधन, 1976 पर्यावरण, वन और वन्य जीवों का संरक्षण
अनुच्छेद 51क 42वां संविधान संशोधन, 1976 नागरिकों के मौलिक कर्तव्य
अनुच्छेद 239कक 69वां संविधान संशोधन, 1991 दिल्ली के संबंध में विशेष प्रावधान
अनुच्छेद 243 से 243ण 73वां संविधान संशोधन, 1992 पंचायती राज व्यवस्था
अनुच्छेद 243त से 243यछ 74वां संविधान संशोधन, 1992 नगरपालिकाएं
अनुच्छेद 243यज से 243यन 97वां संविधान संशोधन, 2011 सहकारी समितियां
अनुच्छेद 246क 101वां संविधान संशोधन, 2016 माल और सेवा कर पर विशेष प्रावधान
अनुच्छेद 279क 101वां संविधान संशोधन, 2016 माल और सेवा कर परिषद
अनुच्छेद 300क 44वां संविधान संशोधन, 1978 संपत्ति का वैधानिक अधिकार
अनुच्छेद 323क 42वां संविधान संशोधन, 1976 प्रशासनिक अधिकरण
अनुच्छेद 323ख 42वां संविधान संशोधन, 1976 अन्य अधिकरण
अनुच्छेद 338क 89वां संविधान संशोधन, 2003 अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
अनुच्छेद 338ख 102वां संविधान संशोधन, 2018 पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोग

हटाए गए या बदले गए Anuchchhed in Hindi

अनुच्छेद स्थिति कारण/महत्व
अनुच्छेद 2क निरस्त सिक्किम को संघ से जोड़ने से जुड़ा प्रावधान था।
अनुच्छेद 31 निरस्त संपत्ति का मौलिक अधिकार हटाकर अनुच्छेद 300क के तहत वैधानिक अधिकार बनाया गया।
अनुच्छेद 31घ निरस्त राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से जुड़े कानूनों के संरक्षण का प्रावधान था।
अनुच्छेद 32क निरस्त राज्य कानूनों की संवैधानिक वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय के विचार से जुड़ा था।
अनुच्छेद 124क निरस्त/अप्रभावी राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से जुड़ा प्रावधान था।
अनुच्छेद 124ख निरस्त/अप्रभावी राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के कार्यों से जुड़ा था।
अनुच्छेद 124ग निरस्त/अप्रभावी राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की प्रक्रिया से जुड़ा था।
अनुच्छेद 131क निरस्त केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक वैधता पर विशेष अधिकारिता से जुड़ा था।
अनुच्छेद 144क निरस्त संवैधानिक वैधता से जुड़े प्रश्नों के निपटारे का विशेष प्रावधान था।
अनुच्छेद 226क निरस्त केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक वैधता पर उच्च न्यायालय के विचार से जुड़ा था।
अनुच्छेद 238 निरस्त पहली अनुसूची के भाग ख वाले राज्यों से संबंधित था।
अनुच्छेद 242 निरस्त कूर्ग से संबंधित प्रावधान था।
अनुच्छेद 257क निरस्त राज्यों की सहायता के लिए संघ के बलों की तैनाती से जुड़ा था।
अनुच्छेद 268क निरस्त सेवा कर से संबंधित प्रावधान था।
अनुच्छेद 272 निरस्त संघ द्वारा लगाए और एकत्रित करों के वितरण से जुड़ा था।
अनुच्छेद 291 निरस्त देशी राज्यों के शासकों की निजी थैलियों से जुड़ा था।
अनुच्छेद 314 निरस्त कुछ सेवाओं के मौजूदा अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़ा था।
अनुच्छेद 329क निरस्त प्रधानमंत्री और लोक सभा अध्यक्ष के चुनाव से जुड़े विशेष प्रावधान से संबंधित था।
अनुच्छेद 370 बदला गया/अधिकतर प्रावधान निष्प्रभावी जम्मू-कश्मीर के विशेष प्रावधानों से जुड़ा था।
अनुच्छेद 362 निरस्त देशी राज्यों के शासकों के अधिकारों और विशेषाधिकारों से जुड़ा था।

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All Articles of Indian Constitution PDF in Hindi

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FAQs on Indian Constitution All Articles in Hindi

मूल भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। बाद में संवैधानिक संशोधनों के कारण इसमें नए भाग, अनुच्छेद और अनुसूचियां जोड़ी गईं।

अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। समय के साथ अदालतों ने इसके दायरे में गरिमा, निजता, स्वच्छ पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और न्यायपूर्ण प्रक्रिया जैसे कई अधिकारों को भी शामिल किया है।

अनुच्छेद 32 नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसे संविधान की आत्मा कहा था, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों की रक्षा का मुख्य साधन है।

मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के भाग III में दिए गए हैं। ये अनुच्छेद 12 से 35 तक फैले हुए हैं। इनमें समानता, स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार और संवैधानिक उपचार जैसे अधिकार शामिल हैं।

राज्य के नीति निदेशक तत्व संविधान के भाग IV में दिए गए हैं। ये अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं। ये सरकार को welfare state बनाने और सामाजिक-आर्थिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए दिशा देते हैं।

मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51क में दिए गए हैं। इन्हें 42वें संविधान संशोधन, 1976 के माध्यम से जोड़ा गया था। बाद में 86वें संशोधन, 2002 से एक और कर्तव्य जोड़ा गया।

चुनाव से जुड़े मुख्य अनुच्छेद 324 से 329क तक हैं। इनमें निर्वाचन आयोग, मतदाता सूची, वयस्क मताधिकार, चुनावी कानून और चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक जैसे विषय शामिल हैं।

आपातकाल से जुड़े अनुच्छेद 352 से 360 तक हैं। अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल, अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन और अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है।

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर से जुड़े विशेष प्रावधानों से संबंधित था। 2019 में इसके अधिकतर प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया गया। इसलिए अब यह पहले की तरह लागू नहीं है।

नए अनुच्छेद संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े जाते हैं। संसद अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन करती है। कुछ संशोधनों के लिए केवल विशेष बहुमत चाहिए, जबकि कुछ के लिए राज्यों की ratification भी जरूरी होती है।
Virendra Soni
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